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Sep 10, 2018

Generations of Computer कंप्यूटर की पीढियां

Generations of Computer
(कंप्यूटर की पीढियां)

सन् 1946 में प्रथम इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube) युक्त एनिएक कम्प्यूटर की शुरूआत ने कम्प्यूटर के विकास को एक आधार प्रदान किया कम्प्यूटर के विकास के इस क्रम में कई महत्वपूर्ण डिवाइसेज की सहायता से कम्प्यूटर ने आज तक की यात्रा तय की। इस विकास के क्रम को हम कम्प्यूटर में हुए मुख्य परिवर्तन के आधार पर निम्नलिखित पॉंच पीढि़यों में बॉंटते हैं:-


कम्प्यूटरों की प्रथम पीढ़ी (First Generation Of Computer) :- 1946-1956

कंप्यूटर की पहली पीढ़ी 1946 में एकर्ट और मुचली के एनिएक (ENIAC-Electronic Numerical Integrator And Computer) नामक कंप्यूटर के निर्माण से शुरू हुई थी। इस पीढ़ी के कंप्यूटरों ने वैक्यूम ट्यूबों का इस्तेमाल किया, जिसका आविष्कार जॉन एम्ब्रोस फ्लेमिंग द्वारा 1904 में किया गया था, इस पीढ़ी में एनिएक के अलावा, कई अन्य कंप्यूटर बनाए गए थे,  एडसैक (ईडीएसईसी - इलेक्ट्रॉनिक डेली स्टोरेज ऑटोमेटिक कैलकुलेटर), एडवैक (ईडीवीएसी - इलेक्ट्रॉनिक डिस्क्रेट वेरिएबल ऑटोमेटिक कंप्यूटर), यूनिवैक (युएनआईवीएसी - यूनिवर्सल ऑटोमेटिक कंप्यूटर), और यूनिवैक -1)।

पहली पीढ़ी के कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े थे, उनकी गति बहुत धीमी थी और स्मृति( स्टोरेज) भी कम थी, इसलिए इस वजह से डेटा को इन कंप्यूटरों में स्टोर करके नहीं रखा जा सकता था । इन कंप्यूटरों की अधिक लागत के कारण, आम व्यक्ति की पहुंच से दूर थे। 

प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटरों के निम्नलिखित लक्षण थे:- 

• वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग 
• पंचकार्ड पर आधारित 
• संग्रहण के लिए मैग्नेटिक ड्रम का प्रयोग 
• बहुत ही नाजुक और कम विश्वसनीय 
• बहुत सारे एयर – कंडीशनरों का प्रयोग 
• मशीनी तथा असेम्बली भाषाओं में प्रोग्रामिंग 

कम्प्यूटरों की द्वितीय पीढ़ी (Second Generation Of Computers) :- 1956-1964 

कंप्यूटर की पहली पीढ़ी के बाद, कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी 1956 में शुरू हुई, वैक्यूम ट्यूब के स्थान पर ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल किया गया जाने लगा था। विलियम शॉकले ने 1947 में ट्रांजिस्टर का आविष्कार किया, जिसका इस्तेमाल दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों में वैक्यूम ट्यूबों के स्थान पर किया गया था। ट्रांजिस्टर के उपयोग ने वैक्यूम ट्यूबों की तुलना में कंप्यूटर को अधिक गति और विश्वसनीयता प्रदान की। ट्रांजिस्टर के आगमन के बाद, कंप्यूटर आकार में भी सुधार हुआ, दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर पहली पीढ़ी के कंप्यूटर की तुलना में आकार में छोटे हो गए।

द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटरों के निम्नलिखित मुख्य लक्षण थे:- 

• वैक्यूम ट्यूब के बदले ट्रॉजिस्टर का उपयोग 
• अपेक्षाकृत छोटे एवं ऊर्जा की कम खपत 
• अधिक तेज एवं विश्वसनीय 
• प्रथम पीढ़ी की अपेक्षा कम खर्चीले 
• COBOL एवं FORTRAN जैसी उच्चस्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओं का विकास 
• संग्रहण डिवाइस, प्रिंटर एवं ऑपरेटिंग सिस्टम आदि का प्रयोग 

क्या आप इसके बारे में जानते हैं? यह भी पढ़ें:-

अध्याय एक : वित्तीय साक्षरता

अध्याय दो : गरीब घर में जन्मे लोग अंततः अमीर कैसे बन जाते हैं?

अध्याय तीन : चक्रवृद्धि की शक्ति 

अध्याय चार : ड्रीम(Dream)


कम्प्यूटरों की तृतीय पीढ़ी (Third Generation of Computer) :- 1965-1971 

कम्प्यूटरों की तृतीय पीढ़ी की शुरूआत 1964 में हुई। इस पीढ़ी ने कम्प्यूटरों को IC (आई.सी.) प्रदान किया। आई.सी. अर्थात् एकीकृत सर्किट (Integrated Circuit) का आविष्कार टेक्सास इन्स्ट्रमेंन्ट कम्पनी (Texas Instrument Company) के एक अभियंता जैक किल्बी (Jack Kilby) ने किया था। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में आईसीएल 2903 (ICL 2903), आईसीएल (ICL 1900), यूनिवैक1108 (UNIVAC 1108) और सिस्टम 1360 (System 1360) प्रमुख थे। 

तृतीय पीढ़ी के कम्प्यूटरों के निम्नलिखित मुख्य लक्षण थे:- 

• एकीकृत सर्किट (Integrated Circuit) का प्रयोग 
• प्रथम एवं द्वितीय पीढि़यों की अपेक्षा तृतीय पीढ़ी आकार एवं वजन बहुत कम 
• अधिक विश्वसनीय 
• पोर्टेबल एवं आसान रख-रखाव 
• उच्चस्तरीय भाषाओं का बृहद् स्तर पर प्रयोग 

कम्प्यूटरों की चतुर्थ पीढ़ी (Fourth Generation Of Computers) :- 1971-1985 

कंप्यूटर की चतुर्थ पीढ़ी की शुरुआत सन् 1971 से हुई | सन् 1971 से लेकर 1985 तक के कम्प्यूटरों को चतुर्थ पीढ़ी के कम्प्यूटरों की श्रेणी में रखा गया है। इस पीढ़ी में IC (Integrated Circuit) को और अधिक विकसित किया गया जिसे विशाल एकीकृत सर्किट (Large Integrated Circuit) कहा जाता हैं। एक Integrated Circuit लगभग 300000 ट्रांजिस्टरों के बराबर कार्य कर सकता हैं। इस आविष्कार से पूरी सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट एक छोटी – सी चिप में आ गयी जिसे माइक्रो प्रोसेसर कहा जाता हैं। इसके उपयोग वाले कम्प्यूटरों को माइक्रो कम्प्यूटर कहा गया। 

ALTAIR 8800 सबसे पहला माइक्रो कम्प्यूटर था जिसे मिट्स (MITS) नामक कम्पनी ने बनाया था। इसी कम्प्यूटर पर बिल गेटस (Bill gates), जो उस समय हावर्ड विश्वविद्यालय के छात्र थे, ने बेसिक भाषा को स्थापित किया था। इस सफल प्रयास के बाद गेट्स ने माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी की स्थापना की जो दुनिया में सॉफ्टवेयर की सबसे बड़ी कम्पनी हैं। इस कारण, बिल गेट्स को दुनिया-भर के कम्प्यूटरों का स्वामी (Owner Of Computers) कहा जाता हैं। 

चौथी पीढ़ी के आगमन से, कंप्यूटर के युग में एक नई क्रांति आई। इन कंप्यूटरों का आकार बहुत छोटा हो गया और स्टोरेज छमता बहुत बढ़ गया, इन कंप्यूटरों का रखरखाव इतना भी आसान हो गया। और इसके साथ इनकी कीमत इतनी कम हो गई की आम जनता इन कंप्यूटर को आसानी से खरीद सकता था | 

इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों के निम्नलिखित मुख्य लक्षण हैं- 

• अतिविशाल स्तरीय एकीकरंण (Very Large Scale Integration) तकनीक का उपयोग। 
• आकार में अद् भुत कमी। 
• साधारण आदमी की क्रय-क्षमता के अंदर। 
• अधिक प्रभावशाली, विश्वसनीय एवं अद् भुत गतिमान। 
• अधिक मेमोरी क्षमता। 
• कम्प्यूटरों के विभिन्न नेटवर्क का विकास। 

क्या आप इसके बारे में जानते हैं? यह भी पढ़ें:-

अध्याय पांच : अमीरी की तरफ धकेलने वाली प्रेरणा
अध्याय छह : सोच बदले
अध्याय सात : सोच वित्तीय साक्षरता का
अध्याय आठ : प्रबल इच्छा को सोने में बदलने के 6 तरीके

कम्प्यूटरों की पांचवीं पीढ़ी (Fifth Generation of Computer) :- 1985 – अब तक 

कंप्यूटर की पांचवीं पीढ़ी 1985 में शुरू हुई। 1985 से अब तक कंप्यूटर पांचवीं पीढ़ी के तहत आते है। कंप्यूटर की पांचवीं पीढ़ी में वर्तमान के शक्तिशाली एवं उच्च तकनीक वाले कंप्यूटर से लेकर , भविष्य में शक्तिशाली और उच्च तकनीक वाले कंप्यूटर तक आते हैं। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में कम्प्यूटर वैज्ञानिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को समाहित करने के लिए प्रयासरत हैं। आज के कम्प्यूटर इतने उन्नत हैं कि वे हर विशिष्ट क्षेत्र, मूल रूप से अकाउन्टिंग, इंजिनियरिंग, भवन-निर्माण, अंतरिक्ष तथा दूसरे प्रकार के शोध-कार्य में उपयोग किये जा रहे हैं। 

इस पीढ़ी के प्रारम्भ में, कम्प्यूटरों का परस्पर संयोजित किया गया ताकि डेटा तथा सूचना की आपस में साझेदारी तथा आदान-प्रदान हो सकें। नये इंटिग्रेटेड सर्किट (Ultra Large Scale Integrated Circuit), वेरी लार्ज स्केल इंटिग्रेटिड सर्किट (Very Large Scale Integrated Circuit) को प्रतिस्थापित करना शुरू किया। इस पीढ़ी में प्रतिदिन कम्प्यूटर के आकार को घटाने का प्रयास किया जा रहा हैं जिसके फलस्वरूप हम घड़ी के आकार में भी कम्प्यूटर को देख सकते हैं। पोर्टेबल (Portable) कम्प्यूटर तथा इण्टरनेट की सहायता से हम दस्तावेज, सूचना तथा पैसे का आदान-प्रदान कर सकते हैं। 

पॉंचवी पीढ़ी के कम्प्यूटरों के निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं- 

1..कम्प्यूटरों के विभिन्न आकार (Different Size of Computer): आवश्यकतानुसार कम्प्यूटर के आकार और संरचना को तैयार किया जाता हैं। आज विभिन्न मॉडलों-डेस्क टॉप (Desk Top), लैप टॉप (Lap Top), पाम टॉप (Palm Top), आदि में कम्प्यूटर उपलब्ध हैं। 

2..इण्टरनेट (Internet):- यह कम्प्यूटर का एक अंतर्राष्ट्रीय संजाल हैं। दुनिया-भर के कम्प्यूटर नेटवर्क इण्टरनेट से जुड़े होते हैं। और इस तरह हम कहीं से भी, घर बैठे – अपने स्वास्थ्य, चिकित्सा, विज्ञान कला एवं संस्कृति आदि-लगभग सभी विषयों पर विविध सामग्री इण्टरनेट पर प्राप्त कर सकते हैं। 

3.. मल्टीमीडिया (Multimedia):- घ्वनी (Sound), दृश्य (Graphics), या चित्र और पाठ (Text), के सम्मिलित रूप से मल्टीमीडिया का इस पीढ़ी में विकास हुआ हैं। 

4..नये अनुप्रयोग (New Applications):- कम्प्यूटर की तकनीक अतिविकसित होने के कारण इसके अनुप्रयोगों यथा फिल्म-निर्माण, यातायात-नियन्त्रण, उघोग, व्यापार एवं शोध आदि के क्षेत्र में।




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