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Aug 24, 2018

ड्रीम(Dream)


ड्रीम(Dream) 

        क्या चीज ऐसी है जिससे कोई व्यक्ति सक्सेस्फुल होता है, कोई व्यक्ति फेल होता है,एक चीज तो ऐसी है धरती पर, जो सक्सेसफुल होते हैं वह भी 9 महीने में पैदा होते हैं और जो फेल होते हैं वह भी 9 महीने में पैदा होते हैं। एक बात तो पक्की है! ऊपर वाले बार्गेनिंग नहीं कर सकता कि उनको फेल बना दो, इनको सक्सेसफुल बना दो। कौन रिस्पॉन्सिबल है?, कौन जिम्मेदार है। जब हम फेल हो जाते हैं तब हम किसी न किसी के ऊपर आरोप लगा देते हैं. देश ऐसा है, समाज ऐसा हैं , लोग ऐसा है, मां-बाप ऐसा है, परिस्थिति ऐसी है, रिपोर्ट नहीं मिला, पैसा नहीं मिला, कुछ नहीं मिला। लेकिन हिस्ट्री उठाकर देखिए जितने लोग इस धरती पर सक्सेस हुए हैं, सफल हुए हैं, सब बेचारे उस जगह से उठे हैं, जहां सफलता की कोई संभावना भी नहीं थी । नहीं थी कोई संभावना। 

      तो मैंने बहुत डीप में स्टडी की, तब मुझे पता चला कि एक चीज ऐसी है अगर वह चीज आपके पास है तो दुनिया में आपकी सफलता कोई नहीं रोक सकता है, और वो चीज आपके पास नहीं है तो धरती पर आपको कोई आदमी सफल नहीं करा सकता। तैयार है सुनने के लिए? वो एक चीज इतनी जरूरत है, इतनी इंपॉर्टेंट है जिसका नाम है- ड्रीम, सपना । 

        मैं बचपन से सुनते आ रहा था कि ज्यादा ऊंचे सपने नहीं देखना चाहिए क्योंकि कभी पूरे नहीं हो सकते। मैंने सुनते आ रहा था भाई सपने तो रात के सपने होते हैं कभी पूरे नहीं होते हैं। 

         सपने क्यों देखना चाहिए? 

        आज मैं आपसे बात करूंगा, क्यों सपने देखना चाहिए और यह सपने कैसे पूरे होते हैं, और सपने क्यों जरूरी है इसकी बात हम आज आप लोगों से करेंगे। क्यों ? क्यों एक आदमी सक्सेसफुल होता है और दूसरे आदमी फेल हो जाता है. आखिर क्यों? एक ही कारण है जो आदमी सक्सेसफुल होते हैं उसने जिंदगी में कुछ सपने संयोजे हैं, उसके पास एक ड्रीम है, एक रीजन है, उसके पास एक कारण है, उसके पास एक वजह है, उसके पास एक गोल है, कोई टारगेट है, स्ट्रॉग वार्निंग डिज़ायर्ड है।और दूसरा शायद यह सोचता रहता है कि पॉसिबल नहीं हो सकता, वो सोचता रहता है कि शायद यह नहीं हो सकता। क्या होता है ड्रीम? 

         ड्रीम किसे कहते हैं? 

         ड्रीम मतलब होता है एक गोल, एक टारगेट, एक इच्छा, एक ज्वलंत इच्छा, कुछ तमन्ना। 

        लेकिन समस्या यह है कि धरती पर 97 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो सपने के बारे में सोचते भी नहीं है। और मजे की बात है कि दुनिया में हर एक इंसान को काम सपनों के लिए ही करना पड़ता है। यह अलग बात है कि आप अपने सपनों के लिए काम करते हो या किसी और के सपनों के लिए काम करते हो। काम तो सपनों के लिए ही होगा मेरे दोस्त। 

          कोई प्राइवेट जॉब में है तो वह सेठ जी के सपने के लिए काम करते हैं, कोई स्टेट गवर्नमेंट के जॉब में है तो वह C.M. के सपनों के लिए काम करता है, कोई सेंट्रल गवर्नमेंट के जॉब में होता है तो वह P.M. के सपनों के लिए काम करता है, कोई मजदूर अगर डेली में नीच ईट भरकर इधर से उधर काम कर रहा है तो वह, उस आदमी के लिए काम कर रहा है जिसने मकान बनाने का सपना देखा है।कोई भी कोई भी इंसान धरती पर काम तो सपनों के लिए ही करता है भाई। यह अलग बात है कि आप काम अपने सपनों के लिए करते हो या किसी और के सपनों के लिए। सपने कैसे होने चाहिए, इंपॉर्टेंट यह है। सपना होना चाहिए एक इमोशनल, जिसके पीछे कोई हिस्ट्री हो, जिसके पीछे कोई चुभन हो, जिसके पीछे कोई एक कारण हो।
       दो तरह के ड्रीम होते हैं एक होता है सुपरफिशियल और दूसरा होता है इमोशनल। 
         सुपरफिशियल ड्रीम आपका का ड्राइविंग फोर्स नहीं बन सकता। एक इमोशनल ड्रीम चाहिए। वो सपना याद आ जाए तो आंख में आंसू आ जाए, वह सपना याद आ जाए तो रोंगटे खड़े हो जाए, वह सपना याद आ जाए तो आदमी चैन से बैठ ना सके, उसी को कहते हैं ड्रीम। सोचो जरा क्या कभी आपने इसके बारे में जरा सोचा है ? सोचा है कभी? 

         मैं इसके लिए एक स्टोरी सुनाता है। 

एक था कुत्ता और एक खरगोश। कुत्ते की नजर खरगोश पर पड़ गई, कुत्ते ने जैसे ही खरगोश को देखा उसने पकड़ने की कोशिश की, उसने खरगोश के पीछे भागा, खरगोश ने उससे बचने के लिए भागा। भागते-भागते वह खरगोश एक छोटे से बिल में जाकर घुस गया। कुत्ता उसे नहीं पकड़ पाया। खरगोश ने उस बिल में से झाककर कुत्ते को देखा। कुत्ते ने हांफते -हाँफते खरगोश से पूछा "खरगोश मैं तुमसे ताकत में बहुत बरा हूं, मैं शरीर से बहुत बड़ा हूँ, मैं तेरे से तेज भागता हूं, लेकिन यह क्या हुआ? मैं तुझे पकड़ नहीं पाया"। खरगोश की आंख में आंसू था, वे डबडबाई आंखों से कहा “कुत्ते भाई तुम अपने लंच के लिए दौड़ रहे थे, और मैं अपनी लाइफ के लिए दौड़ रहा था”। 

       काम तो आप कर रहे हो, सुबह से लेकर शाम तक चाहे जॉब कर रहे हो, चाहे बिजनेस कर रहे हो, चाहे प्रोफेशन कर रहे हो या चाहे पढ़ाई कर रहे हो, लेकिन सोचने की जरूरत है कि आप यह अपने लंच के लिए कर रहे हो या लाइफ के लिए कर रहे हो। 

          अगर आप लंच के लिए कर रहे हो तो सफलता मिलना बहुत मुश्किल है। अगर आप लाइफ के लिए कर रहे हो तो दुनिया की कोई ताकत नहीं है कि आप को हरा दे, और आपकी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंचने दे। मैं कहता हूं कि परिश्रम और लगन योग्यता पर भारी पड़ जाती है। अगर किसी के पास परिश्रम और लगन है और किसी दूसरे के पास सिर्फ योग्यता है तो परिश्रम और लगन योग्यता पर भारी पड़ जाएगी। 

         ड्रीम चाहिए स्ट्रांग पावरफुल, एक अपना होना चाहिए खुद का। पर्सनल ड्रीम। आखिर ड्रीम की परिभाषा क्या है? 

“वर्तमान में असंभव से दिखाई देने वाली चीज के बारे में सोचना।“ वो हैं ड्रीम, सपना। 

       1962 में कैनेडी ने सोचा कि हम चांद पर जाएंगे और वापस आएंगे। एडिशन ने यह सोचा कि दिन के उजाला रात में हो सकती है कि नहीं, यह सोचा। कब सोचा? जब यह असंभव सी थी। एडिशन नहीं है सोचा और उसने बल्ब बना दी। सोचना तो पड़ेगा ! च्वाइस नहीं है मेरे दोस्त।इतना बड़ा सोचना पड़ेगा जितनी बड़ी आपकी ताकत हो, इतना बड़ा सोचना पड़ेगा जो सोचने से आपकी शरीर की रोंगटे खड़े हो जाए, उतना बड़ा सोचना पड़ेगा जो सोते ही आपको चैन ना पड़े और आपकी पैर धरती पर नहीं रुके। उतना बड़ा। 

        कोई आदमी था राइट ब्रदर जो सोचा यह पंछी उड़ सकता है, चील उड़ सकता है, तो इंसान क्यों नहीं उड़ सकता और उसने हवाई जहाज बना डाला। 1 इंच तो कोई चीज उठता नहीं है और उसने हजार फीट ऊंची उड़ा दी। उसने पहले सोचा हम क्या करते हैं? अगर मैं आपके पास आऊं और कहूं "भाई आज मैं आपको एक लाख रुपए महीने कमाना सिखाता हूं।" तो आप कहेंगे " हेँ हें हें पहले आने दो फिर सोचेंगे। " 

        मुझे बताओ कि दुनिया का ऐसा कौन सा काम है जो पहले हो जाता होगा फिर सोचना पड़ता होगा। सोचो ! बहुत बड़ा सोचो, इतना बड़ा सोचो जो सोचने से डर लगता हो। 1962 में कैनेडी को भी डर लगता था चांद पर जाने से, राइट ब्रदर्स को भी डर लगता था, एडिशन को भी डर लगता था, और महात्मा गांधी को भी डर लगता होगा, कि पता नहीं देश आजाद होगा भी कि नहीं। कि पहले हो जाएंगे तब सोचेंगे। पहले उन्होंने सोचा तब देश आजाद हुआ । 

        कभी-कभी डर लगता है। और पता डर लगता है? यार मैंने तो सोच लिया, और जब मैंने सोचा, और यह काम नहीं हुआ तो, तो खेल खत्म।जिंदगी में चैलेंज तो आएंगे मेरे दोस्त। चैलेंज के डर के मारे अगर तुम कहोगे। कि मैंने सोचा और नहीं हुआ तो दुनिया में कुछ नहीं कर पाओगे। 

        मुझे डॉक्टर ने बताया कि यदि ''10 डेसिमल'' का किसी को दर्द होता है, तो आदमी की मौत हो जाती है। लेकिन जब कोई महिला मां बनती है तो उसे ''12 डेसिमल'' का दर्द होता है फिर भी वह जिंदा रहती है और अपने बच्चे को जन्म देती हैं। क्यों? 

        उसके सपना उसके सारे पीड़ा, सारे चैलेंजेज को खत्म कर देती है।बनाओ एक सपना, एक ड्रीम, एक रीजन, जो आप अपने आप को देखना चाहते हैं इस धरती पर।किसी भी ड्रीम में फर्क इस बात से नहीं पड़ता है कि आप क्या कर रहे हो, फर्क इस बात से पड़ता है कि वो काम आप कैसे कर रहे हो।सब्जी बेचने का काम कैसा है ? लेकिन अंबानी सब्जी बेच रहा है, रतन टाटा नमक बेच रहा है। 

         सवाल यह बात का नहीं है कि कोई काम छोटा है या बड़ा, काम किस ढंग से किया जा रहा है सवाल इस बात का है।किस तरीके से आपने उसे किया, किस तरीके से आपने उसे प्रजेंट किया, कोई फर्क नहीं पड़ता है।ड्रीम क्या है? सोचा क्या है? आप का लास्ट एंड स्टेज क्या है? किससे भिजुलाइज कर रहे हो? ये सबसे इम्पॉर्टेंट है।


आपको चाहिए क्या? काम करने की आजादी! अर्थात Freedom.
Freedom  के लिए चार चीज चाहिए।
1.                 Personal Freedom.
2.                 Mental Freedom.
3.                 Emotional Freedom.
4.                 Financial Freedom
इसके लिए चाहिए
1.     Plenty of Money.
      Passive of Money.
       Royalty income available generation to generation .
2.     Plenty of Time to enjoy money and family.
3.     Feature, financial, family, security.
4.     Tension free life.
5.     Name and fame and recognition.


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